दिल ने रख लिया था आपको अंजाने में,
लगा जैसे भूल कर बैठे हम ज़माने में|
दिल के भींगे डोर नाराज़ पड़े थे कोने में,

तेरे अस्तित्व से मुंह मोड़ा
क्यूंकि तेरा इश्क़ कच्चा लगा थोड़ा
पर,
लौट के नज़रे गई वही जहाँ दिल था छोड़ा|

क्या बोलूं आपसे क्या लगा था?
हर एहसास तन में थमा था,
हर साज़ दिल में गा रहा था|

पाया आपके आलोकिक दिल में जो,
वो हमारा शरमाता लाल चेहरा हमने देखा जो,
स्नेह ने पहचाना पहले ना जो,
हम दोनों का मीठा इश्क़ का टुकड़ा था वो|
हम दोनों के मीठे इश्क़ का टुकड़ा था वो!

अब हमारे सिर्फ़ दिन ढलते और रातें बीतती,
ना समंदर से नमक चाहूँ,
ना गुलाब से गुलाबी रंग मांगू,
तेरी आशिक़ी की बारिश में मोर सा नाचना हमेशा चाहूँ|
हम दोनों के इश्क़ का मीठा इश्क़ था वो!

पाया आपके आलोकिक दिल में जो,
वो हमारा शरमाता लाल चेहरा हमने देखा जो,
स्नेह ने पहचाना पहले ना जो,
हम दोनो का मीठा इश्क़ का टुकड़ा था वो|
हम दोनो के मीठे इश्क़ का टुकड़ा था वो!

Tanya Sahay

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