भले था वीरान,  पर खुशनुमा मेरा जीवन था|
था अनजान प्यार से, पर सयाना सा मेरा मन था|
देखके आशिकों को बद-हाल, विचरता था मैं रोजाना|
कुछ तो बात है इस प्यार में , जो पूरा जमाना है इसका दीवना|

ऐसा जादू है मुहब्बत के इस खू़बसूरत से सफर में,
कि हर मुसाफिर खु़शी खु़शी हो जाता है मश्गूल इसमें,
हर कदम की कीमत चुकानी होती है, हर अश्क से इस राह में,
फिर भी सब कुछ सह जाते हैं आशिक़, शिद्दत से किसी की चाह मैं|

जिस प्यार पे मैं करता था शक, जो प्यार था मेरे लिये अफसाना,
जिसका ना था कोई वज़ूद मेरे जीवन में, जिससे रहा था मैं सदा अनजाना,
यही प्यार मेरे जीवन मैं एक दिन, ले आया ऐसा उजास,
जैसे अमृत था यह कोई, जिसने बुझा दी मेरी तृप्ति की प्यास|

जिस परी का अफसाना, बचपन मे सुनाती थी नानी,
सोचा ना था कि एक दिन वही परी, शुरु करेगी मेरी नई कहानी,
जब वही परी मेरे जीवन में, खुशियाँ लेके आ गई,
उसकी हर एक अदा हर एक कशिश, मेरे मन को भा गई|
जो दिल था बचपन से पाबंद, उस दिल पर अपना अक्स छोड़ दिया,
मेरे सूने से जीवन में खलल डालकर, उसने मुझे अपनी तरफ मोड़ लिया|

जो थी अनजान कुछ वक़्त पहले तक, अब बन गई वो मेरी चाहत है,
देखके नूर उसकी आँखों का ,लगता है वो खुदा की अमानत है,
गुलाब से भी ज्यादा है निखार, उसके हसीन से चेहरे में,
जिसके साथ मैं अफर तक जाना चाहता हूँ,
जिसे देखने के लिए तरसती है आंखे तड़के से,
उसे मैं अपना हमसफर बनाना चाहता हूँ|

नहीं जानता हूँ मैं, कि क्या होगा उसका जवाब,
बस इतनी सी दुआ है कि खुदा, पूरा करे उसका हर ख्वाब,
कुदरत की मर्ज़ी से बड़ा, कोई नहीं है यहाँ,
कुदरत ने यह फिर साबित कर दिखा दिया,
एक बावला था जो, था प्यार से कोसों दूर,
कुदरत ने उसे भी, आवारा आशिक बना दिया|

Deepak Hariramani

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