मन, गुस्ताख ये है जो कुछ बताता नही,
दे रही दस्तक दो दिलों को ये मिलाता नही
कहती है ये फिरदौस  निगाहें समझ तो ले
समा जाना इसमें; अब ये दिल तुझको भुलाता नही
 
आ रूह में समा जा मेरे हमदम,
अब तू मेरा मालिक मेरा  हमदर्द भी है  |
 
दिलकश, अदा ये है जो कुछ  दिखाता नहीं,
हर पल फिसलते ज़माने को ये जताता नहीं
नर्म है ये कातिलाना निगाहें देख तो ले
समा जाना इसमें; अब ये दिल तुझको भुलाता नहीं
 
आ लकीरों मे समा जा मेरे हमदम,
अब तू मेरा मालिक मेरा  रहनूमा भी है  |
 
आफ्रीन, फ़ितरत ये है जो कुछ भुलाता नहीं,
हर तड़पते जज़्बात को बेवजह सुनाता नहीं
मदहोश है ये आवारा निगाहें बेहेक तो ले
समा जाना इसमें; अब ये दिल तुझको भुलाता नहीं
 
आ यादों मे समा जा मेरे हमदम,
अब तू मेरा मालिक मेरा  राशिदाह भी है  |
 
अधूरी, ख्वाइश ये है जो कुछ माँगता नहीं,
मंज़िल पाने की उड़ान अब ये चाहता नहीं
बेखौफ़ है ये अंजान निगाहे आज़मा तो ले
समा जाना इसमे; अब ये दिल तुझको भुलाता नहीं
 
आ बाहों मे समा जा मेरे हमदम,
अब तू मेरा मालिक मेरा  दिलबर भी है  |

Manish Pandey

Advertisements