बेटा मेरा कुछ भी चाहे , मैं जो चाहूँ वही करवाऊंगी!

अगर उसका बेटा डॉक्टर है, तो इसे इंजीनियर ज़रूर बनाऊंगी!

अगर ऐसा मैं ना कर पाई, तो बाहर कैसे जाऊंगी?

बच्चों का तो काम है ज़िद्द करना, मैं सबको क्या मुह दिखाऊंगी?

 

सुन रे छोरी! कान खोल कर, घर से बाहर पाओं ना रखना तू।

मैं हूँ सरपंच इस गांव का, अपने बाप की लाज रखना तू।

तू अगर मेरी बात ना मानी, तो लोग बातें बनाएंगे!

खून के आंसू मैं रोऊंगा, जब लोग ताने मार सताएंगे।।

 

देखो बेटी ऐसा मत कर , क्या रखा है इस लड़के में?

है यह लड़का दूसरे जात का, क्या रखा झूठे सपने में?

अच्छी परवरिश दी है तुमको यह बात ना भूलना तुम!

समाज की तो चिंता कर , हमारे इज़्ज़त को ना होने देना गुम।।

 

सुन रे बहुरि! यह क्या कर रही, हमारी नाक क्या कटाएगी?

खूब है पैसा अपने घर में, तू क्या कमाएगी?

यह ले कढ़ाई , यह ले कलछी, शुरू हो जा तू अपने काम में!

बहकी बहकी बातें बंद कर, क्या थू- थू करवाएगी तू समाज में?

 

देखो मेरी बात सुनो! अगर अच्छे अंक नही लाओगी,

लोग कहेंगे, ” देखो सम्हाल लो वरना तुम्हारी बेटी बिगड़ जाएगी!

बचपना अपना अभी छोड़ दो , थोड़ी गंभीर हो जाओ तुम,

नाच-गान से कुछ नहीं होगी , खानदान का नाम बनाओ तुम।।

 

“लोग क्या कहेंगे?” कहने को बस तीन शब्द हैं,

पर ये तीन शब्द, हमारी ज़िंदगी की वो रुकावट है,

जो हमें उन बुलंदियों को छूने से रोकती हैं,

जिनकी हम सिर्फ कल्पना कर सकते हैं।।

 

दोस्तों! अब मेरी बात सुनो, जो तुम्हें लगती सही,

रखा कुछ नहीं है लोगों की बातों में, यह सौ आने खरी बात रही,

लोग तो कहते रहेंगे, लोगों का काम है कहना!

सुनो तुम सबकी बात, पर करो वही, जो तुम्हारे दिल का है कहना।।

 

Shreya Sinha

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