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Literary Society, BIT Mesra

A place for free thinkers

Category

Satire

Articles provoking or preventing change using humor, irony and exaggeration as weapons.

The Tale of A-Merry-go land

Selected as the winner of 'Make Rostra Great Again!', a political satire writing competition in Rostra '18. This is the tale of A merry-go woodland, that lay somewhere beyond the valley of balance and Highlands of sanity. The usually mutually... Continue Reading →

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सबसे बड़ा है रोग , क्या कहेंगे लोग!

बेटा मेरा कुछ भी चाहे , मैं जो चाहूँ वही करवाऊंगी! अगर उसका बेटा डॉक्टर है, तो इसे इंजीनियर ज़रूर बनाऊंगी! अगर ऐसा मैं ना कर पाई, तो बाहर कैसे जाऊंगी? बच्चों का तो काम है ज़िद्द करना, मैं सबको... Continue Reading →

Whirpool of Emotions

BREATH I forget the English meaning of the entities IZZAT, AABROO,DAYRA,PURDAH. I forget the Urdu meaning of the entities HONOUR,FAME,VEILED,PURE I see triumph in my mother's eyes as I make my way to college Modernization engulfs me, transforms me, bewitches... Continue Reading →

मैं समझती हूँ

जब मेरे जन्म पर मुझे लक्ष्मी कहते हो, मैं समझती हूँ। और कहीं मेरे जन्म से पहले मुझे मार देते हो फिर भी मैं समझती हूँ।। हर कदम पर मुझपर ज़िम्मेदारियां डालते हो, मैं समझती हूँ। बचपन से ही पराया... Continue Reading →

ऐसा क्यों होता है?

ऐसा क्यों होता है, चढ़ती हैं मज़ारों पर चादरें हज़ार। बाहर बैठा कोई भिखारी ठंड से मर जाता है।। ऐसा क्यों होता है, बनती है उस मुरती के लिए भोग ढ़ेर। बाहर सोया वो इंसान दो वक्त की रोटी के... Continue Reading →

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